ऑनलाइन शॉपिंग और डिजिटल ट्रांसक्शन के साथ बढ़ती ऑनलाइन धोखाधड़ी और उसके समाधान

अगर आप भी ऑनलाइन शॉपिंग और डिजिटल ट्रांजैक्शन करते हैं तो आपको जरूरत है सतर्क होने की. आजकल ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे है. एक सर्वे के मुताबिक करीब 48% इंडियन ऑनलाइन यूजर्स कभी न कभी ऑनलाइन जालसाजी या धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं. इसका अर्थ है कि हर दूसरे भारतीय ऑनलाइन यूजर के साथ धोखाधड़ी हुई है.

डिजिटल फ्रॉड को लेकर जारी एक रिपोर्ट के अनुसार ऐसी धोखाधड़ी के मामले में इंडोनेशिया के बाद भारत दूसरे नंबर पर है. पिछले साल केंद्र सरकार द्वारा की गई नोटबंदी के बाद मार्केट में कैश की कमी होने से डिजिटल ट्रांजैक्शन में तो भारी बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन इसी के साथ ऑनलाइन फ्रॉड और जालसाजी की घटनाओं में भी तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है. .

वित्तीय क्षेत्र में होने वाले सबसे बड़े फ्रॉड में पहचान का गलत इस्तेमाल करने जैसा संगीन अपराध शामिल हैं. जिनमें फर्जी पैन कार्ड, नौकरी के लिए गलत दस्तावेज़ पेश करना और गलत इनकम सर्टिफिकेट देकर जालसाजी करना शामिल है. इसके अलावा, आइडेंटिटी चोरी से जुड़े फ्रॉड भी 75 फीसदी बढ़े हैं.

समाधान :

ऐसी धोखाधड़ी से बचने के लिए अलग-अलग देश अपने तरीके से इस समस्या का समाधान निकाल रहे हैं. कुछ गवर्नमेंट्स सेंट्रलाइज्ड नेशनल आईडी के जरिए इन फ्रॉड से निपटने की योजना बना रही हैं. इसे रोकने के लिए सिंगापुर सरकार इसके निपटारे के लिए डिजिटल आईडी का ट्रायल कर रही है. इसके अलावा फिलीपींस सरकार ने जल्द ऑनलाइन बायोमीट्रिक एनेबल नेशनल आईडी लाने की योजना बनाई है. भारत में इस समस्या के निस्तारण के लिए आधार कार्ड सही माना जा सकता है.