इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री योगी के भड़काऊ भाषण पर कहा- गलत रिपोर्टिंग से प्रदेश की छवि होगी ख़राब

इलाहाबाद हाईकोर्ट में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भड़काऊ भाषण मामले की सुनवाई चल रही है. कोर्ट ने इसकी मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगा दी है. वर्ष 2008 में गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी द्वारा दिए भड़काऊ भाषण की सुनवाई के मामले में हाई कोर्ट ने रोक लगाई है. इस संबंध में 7 नवंबर को हाईकोर्ट के दो जजों जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस अखिलेश चंद्र के बेंच ने इसपर फैसला सुनाया था.

इस मामले में हाईकोर्ट का कहना है कि योगी आदित्यनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और गलत रिपोर्टिंग से प्रदेश की छवि खराब हो सकती है. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इलाहाबाद के स्थानीय अखबारों और राष्ट्रीय अखबार इस मामले में तथ्यहीन रिपोर्टिंग करते रहे हैं. यही वजह है कि कोर्ट का ध्यान इस ओर दिलाया गया है.

एक खबर के मुताबिक कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल मनीष गोयल ने कहा कि कई बार गलत रिपोर्टिंग की जाती है. बिना तथ्यों के खबरें की जाती है. चूंकी मुख्यमंत्री योगी इस मामले में मुख्य आरोपी हैं, अगर ऐसा हुआ तो राज्य की छवि को नुकसान पहुंच सकता है.

पुलिस के मुताबिक यह विवाद मुहर्रम पर ताजिए के जुलूस के रास्ते को लेकर शुरु हुआ था. इस मामले में तत्कालीन बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ, स्थानीय विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल और उस समय शहर की मेयर रही अंजू चौधरी पर आरोप है कि इन लोगों ने पुलिस के मना करने के बावजूद रेलवे स्टेशन के पास भड़काऊ भाषण दिया था जिसके बाद यह दंगा भड़क उठा था.

जनवरी, 2007 में गोरखपुर में दो समुदायों के बीच दंगा भड़क उठा था. जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे. दंगे के बाद योगी आदित्यनाथ के ऊपर कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था. और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था.