गुजरात चुनाव : जिग्नेश के खिलाफ गैर जमानती वररेंट जारी, लगातार दूसरी बार नहीं पहुंचे सुनवाई में

शहर की एक अदालत ने दलित नेता जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है. ऐसा अदालत ने इसलिए क्यों कि वे सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित नहीं हुए. जनवरी में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली जा रही राजधानी एक्सप्रेस को रोकने को लेकर उनके खिलाफ दर्ज़ एक मामले की सुनवाई के लिए पेश नहीं होने को लेकर अदालत ने उनके खिलाफ ये वारंट जारी किया है.

अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट आर एस लंगा ने कोर्ट के समक्ष पेश नहीं होने के खिलाफ कार्यवाही करते हुए सोमवार को जिग्नेश मेवाणी और 12 अन्य लोगों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया. आपको बता दे कि उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 143 (गैरकानूनी सभा करने), 147 (दंगा) और भारतीय रेल अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था. इस मामले में एक आरोप पत्र भी दायर किया गया था.

मेवाणी के वकील शमशाद पठान ने अपने मुवक्किल को पेशी से छूट दिये जाने की मांग को लेकर अदालत में आवेदन दिया था, जिसपर कल मजिस्ट्रेट ने विचार करने से इनकार कर दिया.

गौरतलब है कि 11 जनवरी को वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन के खिलाफ एक ‘रेल रोको’ विरोध प्रदर्शन के दौरान अहमदाबाद रेलवे स्टेशन पर राजधानी एक्सप्रेस को काफी देर तक रोकने के आरोप में मेवाणी और उनके समर्थकों को गिरफ्तार किया गया था.

मेवाणी ने सोमवार को गुजरात विधानसभा चुनाव में बनासकांठा के वडगाम से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने की घोषणा की थी. मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने परोक्ष रूप से उनका समर्थन करते हुए वहां से अपना उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है. बता दे कि मेवाणी के एकमात्र उद्देश्य भाजपा को हराना है. वाङ्गं कि सीट भाजपा के लिए बहुत मायने रखती है. एक टोटके के अनुसार यदि भाजपा वाङ्गं जीत लेती है तो फिर भाजपा को गुजरात जीतने से कोई नहीं रोक सकता. यही कारण है कि मेवाणी ने चुनाव लड़ने के लिए इस सीट से पर्चा भरा है.