नोटबंदी : हमेशा के लिए अमर हो गई सोनम गुप्ता की बेवफाई की कहानी

हमने पहले भी इतिहास में अमर प्रेम की कहानिया सुनी हैं. पहले भी दिल मिलते थे और फिर अलग हो जाते थे. परन्तु 8 नवंबर 2016 के बाद जो प्यार टूटा, उस टूट दिल से सोनम गुप्ता की बेवफाई की एक अमर कहानी निकली. नोटबंदी के दौरान ‘सोनम गुप्ता बेवफा है’ लिखा हुआ 10 रुपये का नोट देखते ही देखते लोगों के फेसबुक, ट्विटर पर चर्चा का विषय बन गए.

यह सोनम गुप्ता की बेवफाई का ही असर था कि न तो लोग इसे निगल पा रहे थे और न उगल पा रहे थे. प्रधानमातृ ने जनता को कई आश्वासन दिए, परन्तु कष्ट के आगे आश्वासन कमजोर नज़र आये. लोगों ने सोनम की बेवफाई की आड़ लेकर नोटबंदी करने वाली सरकार तक को बेवफा बता डाला. इतना ही नहीं लोगों ने एटीएम और बैंकों को भी बेवफा कह डाला.

इस दौरान घर खर्च चलना इतना मुश्किल हो गया कि लोगों ने अपने छोटे बच्चो के गुल्लक तोड़ दिए. औरतों का बचत बैंक टूटा, नोट बदलने के नियम कई बार बने और टूटे. घर की लक्ष्मियों की वो झूठी कसमें भी टूटीं जो वो अपने पतियों की शर्ट की जेब टटोलते वक्‍त अक्‍सर खा लिया करती थी कि मेरे पास फूटी कौड़ी भी नहीं है. नोटबंदी की बड़ी उपलब्धियों में पत्नियों के झूठ का पर्दाफाश भी शामिल है.

नोटबंदी से ट्रस्ट जनता अपने ही पैसो के लिए भिखारियों कि तरह लाइन में नज़र आई. कई लोगों कि मौत हो गई. कई लोग बेरोज़गार हो गई. इस सब के बीच प्रधानमंत्री मोदी नोटबंदी का मुख्य उद्देश्य बताने में भी असफल नज़र आये. पीएम मोदी द्वारा बताये नोटबंदी के कई उद्देश्यों में कालाधन बाहर लाना, आतंकवादी गतिविधियों पर रोक लगाना, देश को कैशलेस बनाना, जाली नोटों का कारोबार रोकना, इलेक्शन के कारण पार्टीयो के पास रखे पैसों को व्यर्थ करना आदि शामिल थे.